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एस.पी.एम. औटोकॉम्प में औद्योगिक दुर्घटनाएं और यूनियन बनाने का संघर्ष

मानेसर, हरियाणा का इन्डस्ट्रियल माडल टाउनशिप (आई.एम.टी.) दिल्ली-एन.सी.आर. का जाना माना औद्योगिक क्षेत्र है। औद्योगिक क्षेत्र होने के अलावा, यह क्षेत्र मारुती प्लान्ट के कारण भी मशहूर है। मारुती के मजदूरों का संघर्ष भी प्रचलित रहा है, और यह भी जानी हुई बात है कि हाल में ट्रायल कोर्ट ने 13 मजदूरों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मारुती कम्पनी के अलावा, इस इलाके में मारुती जैसी ऑटोमोबाइल कम्पनियों के लिये पुर्जा बनाने वाली भी कई कम्पनियाँ कार्यरत हैं। ऐसी ही एक कम्पनी एस.पी.एम. ऑटोकॉम्प प्राईवेट लिमिटेड है। एस.पी.एम. तथा मारुती का रिश्ता यहीं तक सीमित नहीं है। एस.पी.एम. के मजदूर भी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तथा पुलिस और मैंनेजमेंट के दमन को झेल रहे हैं।

अप्रैल 2017 में, एक मजदूर की फैक्ट्री में भयावह हालातों में मौत के बाद, एस.पी.एम. में यूनियन बनाने का संघर्ष तेज हो गया। पी.यू.डी.आर. द्वारा 18 एवं 24 अक्टूबर को की गई जाँच पड़ताल (फैक्ट फाइंडिंग) में फैक्ट्री के हालातों का मुआइना किया गया। पी.यू.डी.आर. की जाँच टीम, ने एस.पी.एम. के मजदूरों से बात की। इसके अलावा, टीम, अलीयर पुलिस थाना (सेक्टर 3 मानेसर) गई और वहां के प्रभारी से बात की। इसके अतिरिक्त केस से जुड़े वकीलों से भी बात की। टीम उसके बाद प्लांट भी गई ताकि एसपीएम मैनेजमेंट से मिल सके लेकिन मैनेजमेंट की तरफ से किसी के उपलब्ध् न होने के कारण, मुलाकात नहीं हो सकी। जाँच की प्रक्रिया जनवरी 2018 तक चली।

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट की प्रति हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है |

शशि सक्सेना, शहाना भट्टाचार्य

सचिव, पीयूडीआर

5 फरवरी 2018

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